जोखिम प्रबंधन

स्टॉप लॉस क्या है?

स्टॉप लॉस वह ऑर्डर है जो पहले से तय कर देता है कि ग़लत होने पर आप कहाँ निकलेंगे। यह छोटे नुक़सान को बड़ा बनने से रोकता है — और ट्रेडिंग में टिके रहने का सबसे ज़रूरी नियम है।

एक आसान उदाहरण

मान लीजिए आपने एक शेयर ₹500 पर 20 की संख्या में ख़रीदा (कुल ₹10,000)। आप तय करते हैं कि भाव ₹475 से नीचे गया तो आपका अनुमान ग़लत है। आप ₹475 का स्टॉप लॉस लगाते हैं।

अधिकतम नुक़सान ≈ (₹500 − ₹475) × 20 = ₹500 (पूँजी का 5%)

अब भाव गिरकर ₹475 छूते ही ऑर्डर अपने-आप चल जाएगा। बिना स्टॉप के वही शेयर ₹400 तक गिरे, तो नुक़सान ₹2,000 होता — और कई लोग “वापस आएगा” सोचकर उससे भी नीचे तक पकड़े रहते हैं।

स्टॉप लॉस के प्रकार

स्टॉप-लॉस लिमिट (SL)ट्रिगर प्राइस छूते ही आपके तय लिमिट भाव पर ऑर्डर जाता है। भाव पर नियंत्रण, पर तेज़ गिरावट में ऑर्डर न भरने का जोखिम।
स्टॉप-लॉस मार्केट (SL-M)ट्रिगर के बाद मार्केट ऑर्डर — भरने की संभावना ज़्यादा, पर भाव ट्रिगर से ख़राब मिल सकता है।
ट्रेलिंग स्टॉपभाव आपके पक्ष में बढ़ने पर स्टॉप भी साथ-साथ ऊपर खिसकता है, ताकि कमाया मुनाफ़ा कुछ हद तक सुरक्षित रहे।

स्टॉप लॉस कहाँ लगाएँ

  • संरचना के हिसाब से: हाल के सपोर्ट या पिछले निचले स्तर से थोड़ा नीचे — जहाँ पहुँचने का मतलब हो कि ट्रेड का कारण ख़त्म।
  • उतार-चढ़ाव के हिसाब से: शेयर रोज़ जितना हिलता है, स्टॉप उससे बहुत पास न रखें, वरना सामान्य हलचल में ही निकल जाएँगे।
  • पूँजी के हिसाब से: पहले स्टॉप तय करें, फिर मात्रा — ताकि स्टॉप लगने पर नुक़सान पूँजी का छोटा हिस्सा रहे।

आम ग़लतियाँ

  • भाव स्टॉप के पास आते ही स्टॉप को और नीचे खिसका देना।
  • स्टॉप बहुत पास रखना और हर छोटी हलचल में बाहर हो जाना।
  • मन में स्टॉप रखना, पर ऑर्डर न लगाना — फिर फ़ैसला टालते रहना।
  • यह मान लेना कि स्टॉप हमेशा ठीक उसी भाव पर भरेगा (गैप और सर्किट में ऐसा नहीं होता)।

इन आदतों को सुधारने का सबसे सस्ता तरीका है पेपर ट्रेडिंग — हर प्रैक्टिस ट्रेड पर स्टॉप लगाइए और देखिए कि कितनी बार उसने आपको बड़े नुक़सान से बचाया।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

स्टॉप लॉस क्या है?

स्टॉप लॉस एक पहले से लगाया गया ऑर्डर है जो शेयर का भाव आपके तय स्तर (ट्रिगर प्राइस) तक पहुँचते ही अपने-आप आपकी पोज़िशन बेच (या शॉर्ट पोज़िशन में ख़रीद) देता है, ताकि नुक़सान एक तय सीमा से आगे न बढ़े।

ट्रिगर प्राइस क्या होता है?

ट्रिगर प्राइस वह भाव है जिस पर पहुँचते ही आपका स्टॉप-लॉस ऑर्डर एक्सचेंज पर सक्रिय होता है। उससे पहले ऑर्डर सिर्फ़ इंतज़ार में रहता है।

SL और SL-M में क्या अंतर है?

SL (स्टॉप-लॉस लिमिट) में ट्रिगर के बाद एक लिमिट ऑर्डर जाता है — भाव तय रहता है, पर तेज़ गिरावट में ऑर्डर अधूरा रह सकता है। SL-M (स्टॉप-लॉस मार्केट) में ट्रिगर के बाद मार्केट ऑर्डर जाता है — ऑर्डर लगभग ज़रूर भरता है, पर भाव ट्रिगर से ख़राब मिल सकता है। उपलब्धता ब्रोकर और सेगमेंट पर निर्भर करती है।

क्या स्टॉप लॉस हमेशा तय भाव पर ही लगता है?

ज़रूरी नहीं। अगर शेयर किसी ख़बर पर आपके स्टॉप से बहुत नीचे खुले (गैप डाउन), या लोअर सर्किट लग जाए, तो ऑर्डर ख़राब भाव पर भरेगा या भर ही नहीं पाएगा। स्टॉप लॉस जोखिम घटाता है, ख़त्म नहीं करता।

स्टॉप लॉस कितने प्रतिशत पर लगाना चाहिए?

कोई एक सही प्रतिशत नहीं है। स्टॉप वहाँ लगाइए जहाँ आपका ट्रेड का कारण ग़लत साबित हो (जैसे सपोर्ट के नीचे), और फिर मात्रा ऐसी रखिए कि उस स्टॉप पर नुक़सान आपकी कुल पूँजी का छोटा हिस्सा (कई लोग 1–2%) ही हो।

क्या StockYatra पर स्टॉप लॉस का अभ्यास कर सकते हैं?

हाँ। हर प्रैक्टिस ऑर्डर पर स्टॉप-लॉस और टार्गेट लगा सकते हैं और देख सकते हैं कि लाइव-जैसे भाव पर यह कैसे काम करता है — वर्चुअल कॉइन्स से, बिना असली पैसे के।

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